आखिर क्यों प्रसिद्ध है बाँके बिहारी मंदिर की होली ?

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holi in vrindavan

 
परम्परा और विविधता के लिए जाना जाने वाला देश है भारत। यहाँ के उत्सव यहाँ की संस्कृति का दर्पण हैं। हर त्योहार की अपनी – अपनी महत्ता है और मनाने का अपना तरीका है। यूँ तो यहाँ बहुत से त्योहार मनाये जाते हैं पर कुछ मुख्य त्योहार हैं जो विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं। उनमें से एक है “होली“। होली जिसे हम रंगोत्सव भी कहते हैं.. यानी रंगों का त्योहार। बात रंगों की चले और श्री कृष्ण जी का नाम ना लिया जाएतो बात अधूरी समझिये, क्योंकि भगवान कृष्ण का जीवन हर रंग से भरा हुआ है जैसे उनका साँवला वदन और श्वेत निर्मल मन, उनका रंगीन मोरपंख आदि -आदि। तो यूँ तो पूरा देश होली के रंगों मे मदमस्त रहता है पर जो सबसे अनोखी होली खेलते हैं वो हैं श्री बाँके बिहारी जी।

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होली की शुरुआत ही होती है मथुरा – वृंदावन से यानी श्री बाँके बिहारी जी मंदिर से जहाँ कृष्ण कन्हैया सबसे पहले अपने भक्तों के संग होली खेलते है चूँकि कान्हा ने मथुरा में जन्म लिया और वृंदावन में अपनी अदभुत लीलाएँ की हैं इसलिए इन दोनो जगह होली खास महत्व रखती है। वृंदावन में तो जनवरी के महीने से होली का उत्साह दिखने लगता है । बसन्त पंचमी को प्रभु को गुलाल अबीर लगाया जाता है। यहाँ श्री बाँके बिहारी जी के मंदिर की विशेषता है कि यहाँ होली के एक दिन पहले होली खेली जाती है। उसके बाद अगले दिन नगर भर में लोग होली खेलते हैं।
ये मान्यता है इस दिन श्री भगवान को सबसे पहले रंग लगाया जाता है। इसे छोटी होली भी कहते हैं।

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समय के अनुसार 9 बजे मंदिर के पट खोले जाने के बाद सबसे पहले टेशू, गुलाब आदि के फूलों के बने पक्के रंग को श्री बाँके बिहारी जी को लगाया जाता है फिर उन पर ढेरों ढेर फूल बरसा कर अबीर गुलाल लगा कर उनकी पूजा अर्चना की जाती है फिर लोगों के लिए उनका द्वार खोल दिया जाता है। भक्त- गण जम कर कान्हा पर रंग, अबीर- गुलाल, फूल इत्यादि बरसाते हैं।

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पूरा मंदिर गोविंद मय हो जाता है, चारो ओर कान्हा के नाम की जयकार होती है, श्री बाँके बिहारी के नाम को प्रेम से पुकारा जाता है। हर व्यक्ति यही महसूस करता है जैसे कान्हा उसी के साथ होली खेल रहे हैं। लगभग 1:30 बजे ये उत्सव समाप्त होता है। मथुरा वृंदावन की होली खासकर श्री बाँके बिहारी मंदिर की होली हमे जीवन की सम्पूर्णता का परिचय कराती है।
ईश्वर के सामीप्य का अदभुत अनुभव कराती है। ये होली बहुत खास है क्योंकि इसमें भक्ति है प्रेम है और ईश्वर के प्रत्यक्ष होने का एहसास है।

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